Momentum

How to Build Momentum: Hal Elrod अपनी एक किताब में कहते हैं कि उनका घर एक पहाड़ की ऊँचाई पर था। वह कई बार कोशिश कर चुके थे कि बिना रुके घाटी से अपने घर तक साइकिल से जाएं। लेकिन वह हर बार कर नहीं पा रहे थे। इसके लिए उन्होंने कई सारी स्ट्रेटजी अपना कर देख ली। उन्होंने ड्रैग रेसिंग जैसे तेजी से शुरुआत करने की रणनीति अपनाई तो कभी एक ही पेडल मारने की स्पीड बनाए रखने की कोशिश की। कभी आसान शुरुआत करके कोशिश की और बीच में थकान शुरू होने पर तेज पेंडल मारते। कभी motivational गानों की प्ले लिस्ट बनाकर कोशिश करते। लेकिन हर बार बीच रास्ते में ही रुक जाता।

फिर उन्होंने एक दिन निश्चय किया कि सुबह के समय जब कोई ट्रैफिक नही होगा तब घाटी से शुरू करके रोड को न देखते हुए केवल साइकिल के आगे वाले ट्रायल को देखूंगा और एक के बाद एक पेंडल मारता जाऊंगा। यह एक खतरनाक और बेअकल तरीका था क्योंकि उन्हें केवल आगे की डेढ़ फीट की जमीन ही दिख रही थी। इस कोशिश में वो एक आध बार बार गिरते-गिरते भी बचे। लेकिन उन्होंने न समय देखा न रास्ता देखा, वह केवल एक के बाद एक पैडल मारते गए।

जब अपने घर जाने वाले जाने पहचाने रास्तों के रंग के पत्थर दिखने लगे तब जा कर उन्होंने जाकर अपनी नजर उठा कर देखो। उन्होंने देखा कि वह पहाड़ चढ़ चुके हैं और अपने घर पहुंच चुके हैं। वह उस समय बहुत तेजी से चिल्लाये। इतनी तेज की आसपास के पड़ोसी अपने घर के झांक कर सोचने लगे कि इस युवा राइटर के साथ कुछ तो गड़बड़ है। दोस्तों हार्ड एलरोड ने यह कारनामा एक बेहद पावरफुल शक्ति के दम से कर दिखाया। यह शक्ति थी मोमेंटम की।

मोमेंटम का अर्थ

Momentum शब्द असल में लैटिन शब्द Movimentum का ही छोटा स्वरूप है जो कि movere या move से बना है। शायद इसी वजह से हिंदी में संवेग कहा जाता है। जब भी कोई चीज हरकत में यानी मोमेंटम में आती है तो जो चैलेंज कठिन लगते हैं वह आसान लगने लगते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि अगर यह सच है तो Hal Elod बार-बार रुक क्यों रहे थे?

क्योंकि वह अपना पेंडल चलाने के अलावा रास्ता कितना दूर और कितना कठिन है यह भी मन ही मन कैलकुलेट कर रहे थे। पेंडल मारने में मोमेंटम काम कर रहा था, दिमाग में इसलिए जैसे ही उन्होंने अपने डिस्ट्रैक्शन (Distraction) को खत्म कर दिया उनका सफर आसान होता चला गया।

तो क्या हम कह सकते हैं कि डिस्ट्रेक्शन एक तरह का नेगेटिव मोमेंटम है। जी हां, बिल्कुल..  अगर बार-बार डिस्ट्रेक्शन को दोहराया जाए तो वह अपना मोमेंटम पैदा कर लेता है और लक्ष्य पाने में बाधा बनाने लगता है। इस डिस्ट्रैक्शन से निपटना कैसे हैं आइए जानते हैं।

How to Build Momentum | मोमेंटम कैसे बनाएं : 

मोमेंटम बनाना आसान नहीं होता है Hal Elrod कहते हैं कि 90% लोग मोमेंटम का लाभ नहीं उठा पाते हैं। इसलिए लोग अपनी जिंदगी में बड़े बदलाव नहीं ला पाते हैं। क्योंकि उन्हें पता नहीं होता है कि 10 से 12 दिन बाद यह सारे बदलाव आसान लगने लगेंगे। ऐसे में अब पहला सवालिया यह होता है कि मोमेंटम (How Develop Momentum in Hindi) कैसे बनाया जाए?  अगर आप इसे आजमाना चाहते हैं तो सबसे पहले यह स्वीकार कर लीजिए और मान लीजिए कि शुरुआत में मोमेंटम बनाना हर दिन नेम या करेले के जूस से भी कड़वा लगेगा। इसलिए शायद Navy Seal में मंत्र होता है

If it doesn’t suck, we don’t do it…

एक वक्त था जब एक व्यक्ति ने सी डैक में एडमिशन लिया था। उसके इंस्टिट्यूट में हर हफ्ते 7 दिन 12 घंटे की क्लास होती थी। यानी सुबह 8 बजे से रात बजे 8 बजे तक। उसके बाद रात को 9 से 2 बजे तक ऑप्शनल लैब खुली रहती थी। ऐसे में स्वाभाविक है कि शुरू के दिनों में वह व्यक्ति घबरा गया। यह तो एक बहुत ही बड़ा बदलाव था। अक्सर जब हम अपने रूटीन में छोटा सा भी बदलाव लाते हैं तब यह एक बदलाव पूरे सिस्टम को ही हिला देता है। इसलिए कोई भी व्यक्ति बदलाव को पसंद नहीं करता है।

Mark Manson ने अपनी किताब “The subtle art of not giving a f*ck में कहते है कि

“Everything worthwhile in life is won through surmounting the associated negative experience.”

अर्थात जो भी कीमती चीज है इस दुनिया में वो हर चीज उससे जुड़े हुए दर्द और तकलीफ को पार करने के बाद ही मिलती है।

उस व्यक्ति को भी 10 से 12 दिन के अंदर ही 12 घंटे जगे रहने की आदत पड़ गई। जब मौका मिलता सोता था। लेकिन एक बार जब एक बढ़िया कंपनी में उसका सिलेक्शन हो गया तो उसकी मेहनत का लाभ उसे मिल गया।

एक और चीज …कंसिस्टेंसी है इसलिए कहा जाता है कि

“Consistency is equal to Radical Change”

जो भी एक व्यक्ति का गोल होता है उसको करने के लिए उसे हर दिन तीन से चार चीजें करनी होती है। Success मैगजीन के एडिटर का मानना है कि छोटी छोटी हरकत जो हम सब रोजाना करते है वही एक वक्त बाद बड़ा बदलाव Radical Change लाने का काम करती है।

कहने का तात्पर्य है की ये ऐसा improvement जो छोटी छोटी हरकतों को करने से उम्मीद नहीं की जा सकती है, जो परफॉर्मेंस को एक next level पर ले जाए।

Momentum बनाने के लिए कुछ उपाय करना होता है। ये उपाय बहुत छोटे छोटे होते है और इनपर कंसिस्टेंसी बहुत जरूरी होती है।

कंसिस्टेंसी क्या है जानने के लिए देखे : What is Consistency | कंसिस्टेंसी क्या है? कामयाब होने के लिये इसे कैसे डेवेलप करे

अगर आप बहुत व्यस्त रहते है तब एक बेहद प्रैक्टिकल तरीका काफी मददगार हो सकता है इसे कहते है : 3 मिनट = 100% Rule..

कई बार अचानक से कोई जरूरी काम याद आता है ऐसे में इन अचानक से याद आने वाले कामों के लिए यह नियम इस्तेमाल किया जा सकता है। तो पहले जानते है की यह नियम क्या है..?

3 मिनट = 100% Rule – 

3 मिनट = 100% Rule.. के नियम के अनुसार ऐसा काम जिसके लिए 3 मिनट से ज्यादा समय और दिमाग ना लगाना हो और सुबह का कीमती समय न हो तो उस काम तो तुरंत कर डालें। हमेशा अर्जेंट काम को तुरंत करने के बाद ही आगे बढ़ें..क्योंकि ऐसा करने से शांति से सोचने और समझने के लिए आराम से समय निकल आता है और कोई जरूरी काम करने के दौरान बार बार डिस्ट्रैक्शन नही होता है।

एक और बात जब भी कोई काम कंप्लीट हो जाए पेपर पर टिक कर के जब काटते है तो एक सेटिस्फेक्शन मिलता है।

Focus on the Hour – 

कम समय में मोमेंटम (Momentum) बनाने का एक तरीका है केवल उस घंटे पर फोकस करें आने वाले या बीते हुए समय पर नही। अब इसको करने के लिए केवल एक घंटे के लिए अपना कोई टारगेट बनाए और उसे हरहाल में अचीव करने की पूरी कोशिश करे। ऐसे ही अगले घंटे का टारगेट बना कर उसको पूरा करने की कोशिश करे। आप देखेंगे ऐसा करने से काम जल्दी हो आजाएगा और accomplishment की भावना आप को हर घंटे खुशी महसूस करवाएगी। इसी भावना से मोमेंटम बनता है। इसी लिए हिंदी में मोमेंटम का अर्थ संवेग होता है।

Royan Holiday एक लेखक और बिजनेसमैन हैं उसका मानना है कि केवल इस क्षण पर फोकस करें.. क्योंकि हो सकता है आज भविष्य में जिन भूतो की कल्पना कर रहे है वो मिले ही न..

“Focus on the moment, the present,

not the monsters that may not be ahead”

जब भी आप अपनी पूरी ताकत केवल आज में लगा देते हैं तो आप की ताकत कभी कम नहीं होती है। अक्सर कल कल यानी भविष्य को सोचने में बर्बाद होने से बच जाती है। इसलिए हमेशा अगले दिन अगले घंटे का प्रयास और हिम्मत मोमेंटम बनाए रखने में मदद करता है।

Momentum बनाने के लिए जब कोशिश करते है तब शुरुआत में रूकावटें आती है तबियत खराब हो जाना, कोई अर्जेंट काम आ जाना या फैमिली को वक्त ना दे पाना आदि के कारण मोमेंटम बनना रुक जाता है लेकिन वास्तव में यह समस्या subconscious mind की वजह से होती है। क्योंकि दिमाग का यह हिस्सा बदलाव नहीं चाहता है और इसी वजह से चैलेंजेस लाता रहता है और दिमाग ब्लॉक कर के हल भी नही ढूढने देता।

यही वजह है कि हमें दूसरों की समस्याओं का हल आसानी से दिखाई देता है लेकिन खुद की समस्या हम नहीं हल कर पाते है। इसलिए अपने subconscious माइंड को simple daily affirmation जरूर दें। इसमें satisfaction और confidence की फीलिग जरूर हो। क्योंकि संतुष्टि, चैन, सुकून, कृतज्ञता, खुशी या मजा…. ये सारी फीलिंग satisfaction से जुड़ी होती है।

विश्वास, गर्व,  ताकतवर होने की भावनांए आत्मविश्वास की फीलिंग affirmation में जरूर शामिल करे। अगर कोई विशेष तरीका ढूंढ ले तो यह और भी अच्छा है। जैसे “I can do it”.. मन में बार बार बोल कर खुद में हिम्मत और विश्वास पैदा कर ले। आत्मविश्वास से कोई काम करने पर सफलता मिलने लगती है।

दोस्तों उम्मीद करते है कि आप को How to Build Momentum पोस्ट पसंद आई होगी…? आप अपने विचार हमे कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट कर सकते है। अगर आप को यह पोस्ट पसंद आई तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे।

यह भी देखें : लाइफ में चमत्कार तब होते हैं जब आप Positive Attitude रखते हैं…

Source

https://youtu.be/66ACXSlFjlE

कामयाब होने के लिये इसे कैसे डेवेलप करे
%d bloggers like this: